Panini Ashtadhyayi Bhashya, Ramanandacharya Charitam and Rashtraleela of Lord Shri Krishna, written by Rambhadracharya
पीą¤ą¤® मोदी ने राą¤®ą¤ą¤¦्राą¤ार्य ą¤ी तीन पुस्तą¤ों ą¤ा ठनावरण ą¤िया
ą¤ą¤ą¤¦्ą¤ुरु रामानन्दाą¤ार्य स्वामी राą¤®ą¤ą¤¦्राą¤ार्य (ą¤ą¤ą¤¦्ą¤ुरु राą¤®ą¤ą¤¦्राą¤ार्य ą¤
ऄवा स्वामी राą¤®ą¤ą¤¦्राą¤ार्य ą¤े रूप में ą¤
धिठप्रसिद्ध) ą¤ित्रą¤ूठधाम, ą¤ारत ą¤े ą¤ą¤ हिंदू धार्मिą¤ą¤Øेता, शिą¤्षाविद्, संस्ą¤ृतविद्वान, बहुą¤ाषाविद, ą¤ą¤µि, लेą¤ą¤, ą¤ीą¤ाą¤ार, दार्शनिą¤, संą¤ीतą¤ार, ą¤ायą¤, नाą¤ą¤ą¤ार ą¤ą¤° ą¤ą¤„ाą¤ą¤²ाą¤ार हैं। ą¤ą¤Øą¤ी ą¤°ą¤ą¤Øाą¤ं में ą¤ą¤µिताą¤ँ, नाą¤ą¤, शोध-निबंध, ą¤ीą¤ाą¤ँ, प्ą¤°ą¤µą¤ą¤Ø ą¤ą¤° ą¤
पने ą¤्रंऄों पर स्वयं सृą¤ित संą¤ीतबद्ध प्रस्तुतियाँ सम्मिलित हैं। वे ą„Æą„¦ से ą¤
धिठसाहित्यिठą¤ृतियों ą¤ी ą¤°ą¤ą¤Øा ą¤ą¤° ą¤ुą¤े हैं, ą¤िनमें प्रą¤ाशित पुस्तą¤ें ą¤ą¤° ą¤
प्रą¤ाशित पांऔुलिपियां, ą¤ार महाą¤ाव्य,[ą¤ीą¤ा 1] तुलसीदास द्वारा रą¤ित राą¤®ą¤ą¤°ितमानस पर ą¤ą¤ हिंदी ą¤ाष्य,ą¤
ष्ą¤ाध्यायी पर पद्यरूप में संस्ą¤ृत ą¤ाष्य ą¤ą¤° प्रस्ऄानत्रयी शास्त्रों पर संस्ą¤ृत ą¤ीą¤ाą¤ँ शामिल हैं।[1][2]ą¤ą¤Øą¤ी ą¤°ą¤ą¤Øाą¤ं ą¤े ą¤
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वधी, मैऄिली ą¤ą¤° ą¤ą¤ ą¤
न्य ą¤ाषाą¤ं में लिą¤ą¤¤े हैं।